Bharat Bandh : कृषि कानूनों के खिलाफ आज भारत बंद, केंद्र ने राज्यों के लिए जारी की एडवाइजरी

नई दिल्ली: कृषि कानूनों (Agriculture Laws) के खिलाफ देशभर के किसान संगठनों ने आज भारत बंद (Bharat Bandh) का आह्वान किया है. किसान पिछले कई दिनों से हाल ही में पारित किए तीनों कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन (Farmers Protest) कर रहे हैं. इस बीच किसान और सरकार के बीच पांच दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं, लेकिन इससे कोई हल नहीं निकला है.

सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक भारत बंद

किसान संगठनों ने भारत बंद (Bharat Bandh) आह्वान करते हुए कहा कि वो आपातकालीन सेवाओं को इस बंद में नहीं रोकेंगे. इसके साथ ही किसानों ने कहा कि सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक देश भर में चक्का जाम करेंगे, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी ना हो.

केंद्र ने राज्यों के लिए जारी की एडवाइजरी

किसानों के बंद को देखते हुए कई राज्यों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और केंद्र ने भी राज्यों को एडवाइजरी (Advisory) जारी की है. केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एडवाइजरी में कहा कि राज्य सुनिश्चित करें कि बंद के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना ना हो. केंद्र ने बंद के दौरान कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने की अपील की. गृह मंत्रालय ने कहा कि बंद के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो.

आंदोलन को हाइजैक नहीं करने देंगे: किसान

किसानों के भारत बंद को देशभर की लगभग 20 राजनीतिक पार्टियों (Political Parties) ने अपना समर्थन दिया है. इनमें कांग्रेस (Congress) और लेफ्ट के अलावा कई क्षेत्रीय दल भी शामिल हैं. कांग्रेस पार्टी भारत बंद (Bharat Bandh) को सफल बनाने के लिए अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन करेगी. हालांकि किसानों ने साफ कर दिया है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी को वो अपने आंदोलन को हाइजैक नहीं करने देंगे.

कई संगठनों ने दिया अपना समर्थन

किसान संगठनों के इस बंद को कई राजनीतिक दलों (Political Parties) के साथ कई संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया है. दिल्ली की आजादपुर, ओखला और गाजीपुर जैसी मंडियों ने किसानों के आंदोलन को सफल बनाने के लिए बंद का आह्वान किया है. हालांकि दिल्ली के ऑटो चालकों के एसोसिएशन में शामिल ना होने का फैसला किया है. उनका कहना है कि कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन में उन्हें पहले ही काफी नुकसान हो चुका है. कई सारे बैंक संगठनों ने भी इस बंद को अपना समर्थन नहीं दिया है, लेकिन संगठनों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी सभी जिलों के एपीएमसी मार्केट (APMC Market)  बंद रहेंगे. एपीएमसी मार्केट के अलावा सब्जी मंडीयां,  फ्रूट मार्केट, फिश मार्केट,  दूध के केंद्र भी बंद रहेंगे. इसके अलावा राज्य के कई अलग अलग मजदूर संगठनों ने भी इस बंद में शामिल होने का ऐलान किया हैं. दूसरी तरफ रिटेल व्यापारी एसोसिएशनस ने बंद को समर्थन नहीं दिया है. मुंबई में लोकल ट्रेन,  बेस्ट की बसें और मेट्रो ट्रेन सुचारु रुप से चलती रहेंगी. ऑटो रिक्शा यूनियन और टैक्सी यूनियन ने अभी तक भारत बंद पर कोई आधिकारिक स्टैंड नहीं लिया है, अब तक बंद में शामिल होने की बात नहीं की है.

अराजकता फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

कुछ राज्यों ने भारत बंद के बहाने अराजकता फैलाने वालों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं. गुजरात (Gujarat) सरकार ने साफ कह दिया है कि अगर किसी ने इसके बहाने अशांति फैलाने की कोशिश की तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) सरकार ने भी किसानों के बंद का समर्थन किया है, लेकिन वहां भी ये निर्देश जारी किए हैं कि शिक्षा संस्थानों को बंद कर दिया जाएगा और हम किसान संघों से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्वक बंद का सहयोग करें और उनका पालन करें. राज्य सरकार ने कहा है कि अगर किसान किसी भी अप्रिय घटना के बिना दोपहर 1.00 बजे तक बंद का पालन करते हैं, तो इससे आम जनता को असुविधा नहीं होगी.

दिल्ली में बंद का बड़ा असर होने की आशंका

देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में बंद का बड़ा असर होने की आशंका है. ऐसे में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) का कहना है कि बुलाए गए भारत बंद (Bharat Bandh) के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. साथ ही पुलिस ने चेतावनी दी है कि आंदोलन को बाधित करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ या फिर ‘जबरदस्ती’ दुकानें बंद कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

कोर्ट जाने का मन बना रही है केरल सरकार

किसानों के इस आंदोलन के समर्थन में अब केरल सरकार कोर्ट की ओर जाने का मन बना रही है. केरल सरकार ने फैसला किया है कि वो पहले तो इन कानूनों को अपने यहां लागू नहीं होने देगी और इन कानूनों को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी जाएगी. केरल के कृषि मंत्री वीएस सुनील कुमार (VS Sunil Kumar) ने कहा कि हम कृषि कानूनों को लागू नहीं करेंगे. राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा की जाने वाली कार्रवाई के लिए तैयार है. हम इस सप्ताह इन कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. केंद्र की चाल राज्य सरकारों के अधिकार को लागू करने के लिए है, जिसे संविधान द्वारा सुनिश्चित किया गया है. 

प्रकाश सिंह बाद ने पीएम को लिखी चिट्ठी

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल (Parkash Singh Badal) ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने इस चिट्ठी में प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि इन कानूनों को रद्द किया जाए. उन्होंने कहा, ‘मैं इस समय चल रहे किसानों के संकट से बहुत चिंतित हूं. मुझे लगता है कि अगर सरकार ने किसानों पर वास्तव में ईमानदार प्रतिक्रिया पर अधिक ध्यान दिया होता तो इस मुद्दे से बेहतर तरीके से निपटा जा सकता था. तीनों अधिनियमों ने देश को गहरी उथल-पुथल में धकेल दिया है, किसानों और उनके परिवारों को इस ठंड में और अधिक पीड़ा को सहन किए बिना वापस लेना चाहिए. यह मुद्दा अकेले किसानों को चिंतित नहीं करता है, बल्कि देश के पूरे आर्थिक ताने-बाने उसे प्रभावित करता है.’

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