बाबा का ढाबा : 21 साल का सपना एक दिन पहले हुवा पूरा : दिल छूने वाली बाते



बाबा का ढाबा : 21 साल का सपना एक दिन पहले हुवा पूरा : दिल छूने वाली बाते 


दिल्ली के मालवीय नगर में रहने वाले एक बुजुर्ग कपल का वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. इस वीडियो में एक बुजुर्ग कपल की दर्दनाक कहानी थी, जिनका ढाबा लॉकडाउन के कारण ठप पड़ा था और वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे. मगर वीडियो वायरल होने के एक दिन बाद ही जिंदगी से निराश कांता प्रसाद और उनकी पत्नी बादामी देवी की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है. दिल्लीवासियों ने बुजुर्ग कपल की मदद के लिए 2 लाख से ज्यादा की डोनेशन दी है। साथ ही बुजुर्ग कपल का छाबा भी चल पड़ा है दोस्तों. 




दरअसल, मालवीय नगर में ‘बाबा का ढाबा ‘ चलाने वाले बुजुर्ग का नाम कांता प्रसाद है और पत्नी का नाम बादामी देवी है. ये दोनों कई सालों से मालवीय नगर में अपनी छोटी सी दुकान लगाते है. उम्र 80 वर्ष से ज्यादा है. कांता प्रसाद बताते है  कि उनके दो बेटे और एक बेटी है. लेकिन तीनों में से कोई उनकी मदद नहीं करता है.



एक शख्स ने जब उनकी तकलीफ का वीडियो लोगों के सामने रखा तो उनके जीवन में कुछ ही पल में खुशहाली लौट आई. आलम यह है कि गुमनाम जिंदगी जीने वाले बुजुर्ग कपल की जिंदगी से जुड़ी आज हर छोटी बड़ी घटना को लोग जानना चाहते है. बता दें कि बुजुर्ग कपल की जिंदगी बेहद दिलचस्प है. दोनोंं के जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखा है. 



कांता प्रसाद बताते है, जब उनकी शादी हुई वह 5 साल के थे और उनकी पत्नी मैं बादामी देवी मात्र 3 साल की थी. उस दौर में अंग्रेज गैर शादीशुदा महिलाओं का उत्पीड़न करते थे, इसलिए शादियां जल्दी करा दी जाती थीं. उन्होंने कहा हमारे पास कोई विकल्प नहीं था, मुझे इसे पसंद करना था और उसे भी मुझसे लगाव रखना था. यह एक ‘मोहर’ जैसा था, हम पर सिर्फ 5 साल की उम्र में एक साथ रहने का स्टाम्प लग गया था। 1961 में उसके परिवार वालों ने उसे मुझे सौंप दिया, मैं बहुत खुश था और उसे घर लेकर आया. हम 21 साल की उम्र में बेहतर अवसरों की आशा में उत्तर प्रदेश से दिल्ली आया. 



एक दिन पहले हुवा पूरा सपना और जीना चाहता हु 


कांता प्रसाद कहते हैं, मैं 21 साल की उम्र में इस बात के सपने देखा करता था और बीते दिन मैंने अपने सपने को सच होते देखा. ईश्वर हमारी सुनता है, आज नहीं तो शायद 30, 40, 50 या मेरी तरह 80 साल की उम्र में, एक न एक दिन हमारा सपना सच होता ही है, मैं अब और जीना चाहता हूं. अपनी पत्नी को भी यूं ही मुस्कुराते देखना चाहता हूं. उसे बहुत जल्दी समझ आ गया कि कैमरा के सामने कैसे मुस्कुराना है, लेकिन मुझे समय लगा. अब हम अपनी दुकान पर जाना चाहते हैं, अमीरों की तरह दुकान पर किसी काम करने वाले को रखना चाहते है. फिर मैं अपनी पत्नी को पुराने दिनों की तरह चाय पिलाने के लिए लेकर जाऊंगा, यह सब देख कर ऐसा लगता है जैसे बस शुरुआत है.



लगाते थे फलो का ठेला 

दिल्ली की अपनी जिंदगी के बार में वे बताते हैं, हम यमुना किनारे रहा करते थे. फिर समय बीता और यहां आ गए. मैंने फल के ठेले से शुरुआत की थी. लेकिन जब बच्चे बड़े हुए तब मैंने कुछ बेहतर करने का सोचा और हमने ‘बाबा का ढाबा’ शुरू किया. हमारी शुरुआत बहुत धीमी हुई थी, हम बस ज़रूरत पूरी करने भर की कमाई कर पाते थे और यह सिलसिला लगभग 30 सालों तक चला. गुरुवार को जब मैंने लोगों, नेताओं, अभिनेताओं और मशहूर लोगों की भीड़ देखी तब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.

ये काहानी दिल छूने वाली है और यही लोगो का प्यार है और यही मीडिया की ताकत है दोस्तों. Source 

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