बिहार इलेक्शन और कोरोना काल

दोस्तों जैसा की हम जानते है की नयी खबर के नुसार बिहार के इलेक्शन का ऐलान हो चूका है. क्या ये कोरोना के संकट काल मे सही पड़ाव है ? आज हम इसके बारे मे जानने वाले है दोस्तों, चलिए जानते है बिहार इलेक्शन और कोरोना संकट के बारे मे. 



बिहार चुनाव की तारीख एलान 


बिहार (Bihar) में होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Election Date announce) के लिए चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है दोस्तों. राज्य में कुल तीन चरणों में वोटिंग होगी. 28 अक्टूबर को पहले चरण का मतदान होगा और 3 नवंबर को दूसरे और 7 नवंबर को तीसरे और आखिरी चरण का मतदान कराया जाएगा दोस्तों. 10 नवंबर को वोटों की गिनती होगी. ये अभी तक हो गया होता पर कोरोना के चलते इसे देरी होने के कारण रुक गया था. 


कोरोना समय मे चुनाव लेना ठीक था ? 


दोस्तों जैसा की हम जानते है कोरोना महामारी की वजह से सारी दुनिया थम सी गई थी. अभी अभी लोगो को थोड़ी राहत मिलने लगी है. पर ऐसा नहीं की कोरोना महामारी चली गई हो दोस्तों. आप इससे सतर्क रहे सुरक्षित रहे, जब तक कोरोना की वैक्सीन बाजार मे उपलब्ध नहीं होती तब तक इस महामारी का रौद्र रूप थम्बने वाला नहीं है. आज दुनिया की नजर मे देखे तो भारत दूसरे नंबर पर कोरोना केसेस मे आगे है दोस्तों. वैसे देखे तो लोग कहाँ तक और कब तक रुक सकते है. ज़िन्दगी सभी को जीना है, ज्यादा दिन कुछ लॉक डाउन नहीं कर सकते, पर एक काम हम हमारे परिवार और समाज के लिए कर सकते है दोस्तों. वो काम है हम कही भी जाये वहाँ मास्क और sanitizer का उपयोग अवश्य करते रहे. 



इलेक्शन की अगर बात कर तो इलेक्शन हमारे देश का लोकतंत्र का एक मजबूत हिंसा है. जो हमारे जैसे आम लोगो को चुनाव करने का मौका देती है. ये सभी सविधान की ही हमें देन है दोस्तों. पर क्या कोरोना के इस संकट मे इलेक्शन की जल्द बाजी करना सही बात साबित हो सकती है ? क्या ये election लस आने के बाद भी हम ले सकते थे ? ये सारे सवाल हम सब भारत वासियो को आज आ रहे है दोस्तों. 



आज भारत मे दुनिया में सबसे ज्यादा तेजी से कोरोना संक्रमण भारत में ही फैल रहा है. देश में पिछले 24 घंटों में 86,052 नए कोरोना मामले दर्ज किए गए हैं और 1141 लोगों की जान भी चली गई है. 2 सितंबर से लगातार देश में एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. अच्छी खबर ये है कि 24 घंटे में 81,177 मरीज ठीक भी हुए है. छह दिनों बाद ठीक होने वाले मरीजों की संख्या नए कोरोना संक्रमितों से कम दर्ज की गई है. डेटा 25 सितम्बर से लिया गया है दोस्तों. 



आज हमारे देश के लिए लोगो का जीवन बहुत मूल्यवान है दोस्तों. आप सोचिये जब इलेक्शन होंगे तो कितनी भीड़ एक जगह बहोत सारे गुट तैयार होकर प्रचार मे लगे रहते. हम ऐसा नहीं कह रहे है की ये कदम गलत है पर हम यह सोच रहे है की देश के कोरोना मरीजों की संख्या देखे तो बहोत है दोस्तों और बुद्धिजीवी लोगो की माने तो दो महीनों मे यह संख्या बढ़ती ही चली जाने वाली है क्या ये कदम हमारे जैसे आम आदमी के लिए बेहतर साबित हो सकता है. 



आज हम सुने तो हर हस्पताल मे लाखो रुपये तक का खर्च की बात हम सुनते आ रहे है. ठीक है जिनके पास इलाज करने के लिए पैसे है वो लोग कर सकते है मगर सरकार ने भी काफ़ी इंतजाम कर दिए है, पर क्या वो सभी इंतजाम गरीबो तक पहुंच रहे है दोस्तों, हमारा यही दायित्व है की हम सतर्क रहे सुरक्षित रहे और मतदान हमारा हक़ है इसे तो हमें निभाना ही पड़ता है. इससे हमारे आने वाले सालो को बेहतर भारत का निर्माण होता है. पर ध्यान रहे सतर्कता निभाना भी उतना ही कारगर साबित रहेगा. ये आम चुनाव नहीं बल्कि कोरोना चुनाव होने के आसार ना बन जाये इसका ध्यान रखियेगा. 



दोस्तों उम्मीद करता हु ये हमारा छोटासा लेख आपके लिए सतर्कता और समजदारी का माध्यम बने और बिहार इलेक्शन और कोरोना के इस लेख को आप लोगो तक पहुचाये. 

Write By Saavn Kale
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