Rahat Indori जी का जीवन सफर

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Rahat Indori दोस्तों आज हम ऐसे व्यक्तिमत्व के बारे मै बात करने वाले है, जिनका अंदाज और जिनके अल्फाज जुबा पर,  जिनकी पकड़, जिनकी एक एक शब्द को अपने जुबा पे ही रचना, एक भी शब्द कही बेकार ना हो जाये इसकी सावधानी बरतना, ऐसे कही सारे अंदाज जिसपर सोचने के लिए कही ज्यादा विचारों का समूह लगता है, उसे अपने अल्फाज मै प्रेजेंट करना वह सिर्फ और सिर्फ Dr.Rahat Indori  जैसे माहान इंसान ही कर पाते है। 


आज हम जानने वाले है Rahat Indori  जी का जीवन सफर जैसे क्रिकेट एक मजब है तो सचिन तेंदुलकर उसके भगवान है, अगर एक एक्टिंग एक मजब है तो दिलीप कुमार उसके भगवान है, अगर शायरी एक मजब है तो यक़ीनन Rahat Indori उसके भगवान है। 

Rahat indori का जीवन सफर 

Dr.Rahat Indori जी का जन्म इंदौर, मध्य प्रदेश के एक साधारण मुस्लिम परिवार मै हुवा, Rahat जी अपने माता पिता के चौथे संतान थे। rahat जी के पिताजी एक कपड़ा मिल मै कर्मचारी थे, इनका नाम राफदुल्लाह कुरैशी था। उनकी माता गृहणी थी उनका नाम मकबूल उन निशा बेगम था। rahat जी की शादी 27 मे 1976 को सीमा राहत के साथ हुई। 

राहत जी को तीन संतान है, राहत जी का प्राइमरी स्कूल की शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर से हुई, ना सिर्फ पढ़ाई मै अव्वल रहते थे बल्कि राहत अपने स्कूल मै हॉकी टीम के कप्तान हुवा करते। इनकी प्रतिभा का सिलसिला आगे भी चलता राहा इंदौर के ही एक कॉलेज इस्लामिया कॉलेज से इन्होने पढ़ाई की, 1975 मै मध्य प्रदेश,भोपाल के बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी से उर्दू लिटरेचर मै MA किया। 

राहत जी ने 1985 मै उर्दू मै लिखी हुई थीसिस उर्दू मै मुशायरा की वजह से इन्हे मध्य प्रदेश की भोज यूनिवर्सिटी मै पीएचडी की उपादि दीं। डॉ.राहत इन्दोरी ने 19 साल की उम्र मै अपना पहला मुशायरा पढ़ा था। शुरवाती दिनों मै राहत जी के परिवार की इतनी अच्छे  हालत नही थे, तो उन्होने 10 साल की उम्र मै ही एक चित्रकार के रूप मै काम करना शुरू किया था, क्युकी चित्रकारी भी उनकी एक रूचि थी। 

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एक समय ऐसा था की अपने शहर के व्यस्ततम बोर्ड चित्रकारों मै से एक थे। ग्राहकों को कही कही महीनों तक इनके बनाये गए बोर्ड का इंतज़ार करना पडता था।  इतने संघर्ष के बाद भी इन्होने अपनी पढ़ाई जारी रखी बाद मै इंदौर मै उर्दू साहित्य पढ़ना शुरू कर दिया था। एक अच्छे वक्ता होने के कारण बहोर जल्द ही लोगो और स्टूडेंट के चाहते बन गए। 

पर उनके जीवन मै होने को तो कुछ और ही मंजूर था, मुशायरो मै इनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई ना सिर्फ देश से बल्कि विदेशो से भी राहत जी को मुशायरो के लिए बुलाया जाता था। यही नही राहत जी ने हिंदी फिल्मो मै भी कही हिट गाने लिखें है। मुन्ना भाई का M M बोले तो यह गाना राहत जी ने ही लिखा है। 

राहत जी के उपलब्धिया इतनी है की इस अवार्ड के अगर एक एक अवार्ड को बताना शुरू करू तो आपको  पढ़ने मै पूरा दिन बीत जाये। राहत जी को दुनिया के तमाम मुल्क मै उर्दू मै इनके बेहतरीन काम के लिए इन्हे सन्मानित किया गया है। 

राहत जी हमें अब उनके लब्ज के दुनिया मै छोड़ कर 11 अगस्त 2020 को उन्होने इस दुनिया को अलविदा कहाँ।

 
“दो गज सही ये मेरे मिलकियत तो है, 
ये मौत तुने मुझे जमींदार कर दिया”
-Rahat Indori 


उन्होने हमें यह सिख दीं है, की हालत कितने भी बुरे क्यों ना हो खाबो को पूरा करने की जिद कभी नही छोड़नी चाहिए। 


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