Pandit Jasraj जी का जीवन


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Pandit Jasraj जी की बायोग्राफी 


दोस्तों आज हम ऐसे इंसान के बारे मै जानने वाले है,  जिनकी पूरी उम्र सारी दुनिया मै अपने संगीत की जादू दिखाने मै लीन हुई, दोस्तों आज हम उनका जीवन जानने वाले है। 


Pandit Jasraj जी का जीवन सफर 

कहाँनी की शुरूवात होती है, 28 जनवरी 1930 को हरियाणा के फातियाबाद के पीलीमंदोरी गाव मै उनका जन्म हुवा। pandit jasraj जी को संगीत विरासत मै मिला है, सन 1934 मै जब वह 4 साल के थे, तब उनके पिताजी ने दुनिया को अलविदा कहाँ तब सभी भार उनके बड़े भाई पंडित मनीराम पर आ पड़ा। पंडित मनीराम मेवाती घराने के श्रेष्ठ गायक थे।


इन्होने आपने मंजले भाई को पंडित प्रताब नारायण को गायन और jasraj जी को तबले की शिक्षा देना चालू कर दिया था। jasraj जल्द ही तबले मै निपुण होते गए और धीरे धीरे दोनों भी भाई संगीत समारोह मै जाते रहे।  यही देखते देखते jasraj जी सोचते थे, जब कोई गायक उस आसान पर बैठता है तो उसे एक अलग सन्मान मिलता है, जब यह बात पंडित मनीराम जी को पता चली तो उन्होने ने jasraj जी को गायन की शिक्षा चालू कर दीं थी। देखतेही देखते jasraj जी गायन मै निपुण होते चले गए। 

Pandit Jasraj ji ki biography 


धीरे धीरे jasraj कंठ संगीत मै उन्नति करते गए वह प्रान्तकाल मै राग भैरव और सायंकाल मै राग मुल्तानी और रात्रि मै राग पूजा का अभ्यास कराया जाता था। प्रत्येक दिन 4 घंटे अभ्यास करते और देखतेही देखते उनके मेवाती घराने की संगीत कला उनको अवगत होती चली गई। सात वर्ष के अभ्यास के कारण वह एक कुशल गायक के रूप मै उभर गए। 


सन 1950 मै jasraj आकाशवाणी पर अपना कार्यक्रम देते थे, साथ ही साथ आपने गुरु / मनीराम जी के साथ संगीत सम्मेलन मै जुगलबंदी भी करते थे। इनका पहला एकल गायन नेपाल के राजा महाराज त्रिभुवन के सम्मुख हुवा था। जिन्होने इनको 5000 मोहरे इनाम के तोर पर दिए थे। 


मेवाती घराना जोधपुर (राजस्थान ) से आता है। जहाँ जसराज जी के पूर्वज 300 वर्ष पहले हरियाणा के फतेहाबाद जिल्हे मै बस गए थे। jasraj जी के पिता एक मशहूर गायक थे, जो कश्मीर के महाराज प्रताप सिंह के दरबारी गायक के रूप मै गायक थे। बाद मै ये हैदराबाद रियासत मै निज़ाम के पास प्रतिष्ठित हुए थे। सन 1934 मै उनका निधन हुवा। 


Jasraj जी को उनके जीवन काल मै बहोत सारे सन्मान उन्हें मिले है, पद्म भूषण, पद्मविभूषण और पद्म श्री जैसे बड़े बड़े अवार्ड उनको मिले है। उन्होने भारत मै ही नही बल्कि कनाडा, अमेरिका मै संगीत की शिक्षा दीं उनसे जुडी एक खास बात ये है की अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने 2006 मै खोजे गए हिम ग्रह 2006 vp 32 पंडित जसराज नाम दिया था। 


देखते ही देखते 17 अगस्त 2020 को जसराज जी ने दुनिया को अलविदा कहाँ।  पर उन्होने जो संगीत की दुनिया मै बीज बोये है उन्हें हमेशा याद किया जायेगा वह जाकर भी हमारे बिच संगीत के दुनिया मै रहेंगे। 


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