Mother Teresa सेवा से संत तक

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अनुक्रम 
1 – Mother Teresa शुरवाती जीवन 
2 – Mother Teresa मानव सेवा 
3 – Mother Teresa पुरस्कार ( पदवियाँ )
4 – Mother Teresa संत की उपाधि 
5 – Mother Teresa quotes 

दोस्तों दुनिया मै कुछ लोग ऐसे होते है की वह इस दुनिया मै खुद के लिए नही दुसरो के लिए जीते है, ऐसे ही मानवता के इस युग के एक संत के बारे मै आज जानने वाले है. दोस्तों उनका नाम है Mother Teresa ऎसी संत जो पूरा जीवन औरो की सेवा मै लगाए, जिस तरह से स्वामी विवेकानंद जी को भगवान के सपने आते थे वैसे ही mother Teresa को भी उसी तरह भगवान ने गाइड किया है ऐसा कहाँ जाता है. जिन्होने पूरा जीवन गरीब लोगो की सेवा मै लगा दिए.आपको अपने जीवन मै कुछ बनना हो तो आप Mother Teresa जी को ideal बनाकर अपना भी जीवन सफलता के रास्ते ला सकते है. 


Mother Teresa शुरवाती जीवन 

कहाँनी की शुरवात होती है 26 अगस्त 1910 का Mother Teresa उनका वास्तविक नाम ( अगनेस गोझा बिआजिजु ) जी का स्कोप्जे, नॉर्थ मैसेडोनिआ जन्म हुवा उनके पिता का नाम निकोले बिआजिजु उनके पिताजी पेशे से व्यापारी थे. Mother Teresa यह नाम उनको अपनी सेवा से मिला था जब Mother Teresa महज 8 वर्ष की थी तब उनके पिता का देहांत हो चूका था. इसके बाद उनके पालन पोषण उनकी माँ डरानाफिले बिआजिजु ने किया. 


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Mother Teresa जी को पांच भाई बहन थे जिनमे Mother Teresa जी सबसे छोटी थी. उनके जन्म के समय उनकी बड़ी बहन की उम्र सात साल और उनके भाई  मात्र 2 साल के थे. Mother Teresa जी को बचपन मै गाना गाने का बहोत शोक था, तब वह अपने बहन के साथ मिलकर गाते थे, ऐसा कहाँ जाता है की जब वह 12 साल की थी तभी उन्हें यह अनुभव हो गया था की वह अपना पूरा जीवन गरीब लोगो के सेवा मै लगाएंगी. 

 
देखतेही देखते इसकी शुरवात 18 साल के उम्र होने पर शुरू हुई सिस्टर ऑफ़ लेलोटो मै सामलोन का फैसला किया, इसके बाद वह आयरलैंड गई जहाँ उन्होने अंग्रेजी भाषा सिख ली, उन्होने इंग्लिश इस लिए सीखी थी क्युकि सिस्टर्स इसी भाषा मै बच्चों को आत्म पढ़ाया करते थे. Mother Teresa आयलैंड से 6 जनवरी 1929 को कोलकाता मै लोटो कान्वेंट मै पहुचे वह एक अनुशाषित शिक्षिका थी और विद्यार्थी उनको बहोत प्यार करते थे.
 

जब वर्ष 1944 मै वह हैडमिस्टेट बन गई तब वह  बाहर देखती तो उस वक्त बहोत गरीबी होने के कारण उनका मन यहाँ नही लगता, क्युकि बाहर की गरीबी बीमारी देख उनको अच्छा नही लगता था, उनकी देख रेख के लिए कोई न था. जब 1943 मै अकाल पड़ा था तब लोग गरीबी से बेहाल हो गए थे. इसके बाद 1946 मै दोगुटो के बिच दंगे हुए थे उससे भी लाखो लोगो को गरीबी मै लाकर खड़ा किया था. उस समय कोलकाता की स्तिथि बहोतही ख़राब हो चुकी थी इसके बाद Mother Teresa जी ने 1946 मै गरीब, बीमार और भूके लोगो की मदत करने के लिए मन बना लिया था. 


इसके बाद Mother Teresa ने पटना मै होली फॅमिली मै आवश्यक नर्सिंग ट्रेनिंग पूरी की वहाँ पहली बार तालतला (जगह का नाम ) जहाँ गरीब लोगो की देखभाल करने वाली संस्था के साथ रही. उन्होने मरीजों के घाव तक को अपने हातों से धोया है उनकी मलम पट्टी करना उनकी गोलियों की देखभाल करना ऐसे ही सेवा करती रही और धीरे धीरे उनके इस कार्य की चर्चा सारे देश मै फैलती चली गई, लोगो का ध्यान उनपर जाने लगा और लोगो मै कुछ उच्च अधिकारी और उनमे भारत के पंतप्रधान भी शामिल थे उन्होने उनके काम की सहराना की जब उन्होने इस कार्य को चालू किया था.


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तब उनको अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी थी तब और लोगो ने उनके काम को सहारा और उनको मदत की, इतना होने के बाद भी उन्होने हार न मानी 7 ओक्टोबर 1950 को उन्हें बेटिकल से संस्था लीडर ऑफ़ मिशनरी कोलकाता  स्थापना की अनुमति मिल गई. इस संस्था का उद्देश्य भूके, अंधे, लगंड़े और जो बचपन से निराधार हो और चाहे वह चर्म रोग से ग्रसित ऐसे ही लोग जिनको समाज ने ठुकरा दिया था, इसी के साथ लोगो की उन्होने बहोत सेवा की इसमे उन्होने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया. 


Mother Teresa मानव सेवा 


सन 1981 मै mother teresa जी ने अपना नाम बदल दिया था और Teresa रख दिया इसी वक्त उन्होने आजीवन सेवा अपना ली थी. उन्होने ऐसा खुद लिखा है की ” जब 10 सितम्बर 1940 दिन था जब मै अपने वार्षिक अवकाश Darjiling ( दार्जिलिंग ) जा रही थी, उसी समय मेरे अंतर आत्मा से आवाज उठी थी की मुझे सब कुछ त्याग कर देना चाहिए और अपना जीवन ईश्वर एवं दरिद्र की सेवा कर के कंगाल तन को समर्पित कर देना चाहिए “
आगे भी ऎसी ही सेवा करते करते 5 सितम्बर 1997 को उन्होने इस दुनिया को अलविदा कहाँ ऐसे माहान आत्मा को मेरा प्रणाम. 


Mother Teresa पुरस्कार ( पदवियाँ ) 

Mother Teresa जी को बहोत सारे सन्मान दिए गए है हम कुछ महत्वपूर्ण अवार्ड के बारे मै जानते है. 

– 1931 पोपजान 23 वे का शांति पुरस्कार. 
– विश्व भारती विद्यालय ने उनको देशिकोत्तम पदवी दीं.
– अमेरिका के कैथोलिक विश्व विद्यालय ने डिरेक्टरेट की पदवी. 
– 1962 मै पद्मश्री की उपाधि मिली. 
– बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय ने उनको डी – लिट की पदवी दी. 
– 19 दिसंबर 1979 मै मानव कल्याण हेतु नोबल पुरस्कार प्रदान. 


Mother Teresa संत की उपाधि 


09 सितंबर 2016 को वैटिकन सिटी मकान पोप फ़्रांसिस ने दी संत की पदवी. 

Mother Teresa quotes 
Mother Teresa जी के विचार 

* If you judge people, you have no time to 
Love them. 

* There are no great things, only small think with great love. HAPPY ARE THOSE. 

* if you can’t feed a hundred people, then feed just one. 

* If we have no peace, it is because we have forgotten that we belong to each other. 

* Let us always meet each other with smile, for the smile is the beginning of love. 


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