Nelson Mandela जीवन के 27 साल जेल मै बिताकर बने देश के पंतप्रधान

दोस्तों एक ऐसा भी समय था तब हर सुविद्याए जंग के आधार पर बटी हुई थी। बात चाहे बस की सीट की हो या किसी सार्वजनिक जगह पर मिलने वाली किसी भी सुविधा की हर जगह रंग के आधार पर गोरो को अच्छी और काले लोगो को सबसे बुरी सर्विस मिलती थी।  


वैसे तो इसका प्रभाव कही थोड़ा तो कही ज्यादा देखने मिलता था। दक्षिण अफ्रीकाई देशो मै रंग को लेकर भेदभाव पहले से था। लेकिन नेशनल पार्टी के सरकार ने 1938 मै यह गाइड लाइन जारी की काले और गोरे लोग अलग अलग जगह पर रहेंगे और हर सुविधा रंगों के हिसाब से बाट दिया गया लेकिन बुराई पर हमेशा अछाई  की जीत होती आयी है और आगे भी होंगी रहेगी। 



जानते है उनका जीवन 

नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलै 1918 को साउथ अफ्रीका के मावेजो गाव मै हुवा था। उनकी माँ का नाम नोस्कैनी और उनके पिता का नाम गेटला हेनरी था। जन्म के समय नेल्सन मंडेला का नाम घर वालो ने रोलेल हाला रखा था जिसका मतलब शरारती होता है।  


लेकिन स्कूल के टीचर ने उनका नाम नेल्सन रख दिया ,मंडेला ने अपनी शुरू की पढ़ाई क्लार्क बेर्री मिशनरी स्कूल मै की मंडेला जब 12 साल के थे तब उनके पिता की मृत्यु हुई। उनके जॉइंट फॅमिली ने उन्हें पिता की कमी कभी महसूस नहीं होने दी। आगे की पढ़ाई के लिए उनको पूरी मदत की क्युकी नेल्सन पुरे परिवार मै एकमात्र थे जो स्कूल गए थे। 


उनकी ग्रेजुएशन की पढ़ाई हील्डटौन कॉलेज मै हुई थी। यह कॉलेज सिर्फ काले लोगो के लिए बनाया गया था। इसी कॉलेज मै मंडेला की मुलाक़ात अलीवर्ड ताम्बो से हुई जो जीवन भर उनके दोस्त रहे और रंग भेद की लड़ाई ने उनका हमेशा साथ दिया। कॉलेज के समय से ही उन्होने भेदभाव के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी थी। 


लोगो को इक्कठा करने लगे जिसकी वजह से उन्हें कॉलेज से ही निकाल दिया था। 1944 मै वे अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस मै शामिल हुए जिसने रंग भेद के विरोध आंदोलन पहले से ही चला रखा था। फिर वह 1947 मै वे उस पार्टी के सचिव चुने गए अब उनके साथ धीरे धीरे कर बहोत सारे लोग जुड़ने लगे थे। 

अपने लक्ष की और बढ़ने लगे पर 1961 मै मंडेला और उनके कुछ दोस्त के खिलाफ देश द्रोह का केस चला। इसके चलते उन्हें जेल बंद कर दिया हालाकी बाद मै उन्हें निर्दोष मान छूट गए लेकिन फिर से 5 अगस्त 1962 को मजदूरों को हड़ताल मै उकसाने के कारण उन्हें फिर से जेल हो गई और लगभग दो साल तक केस चलने के बाद 12 जुलै 1964 को उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई। 

सजा के लिए उन्हें सबसे कड़ी सुरक्षा वाली जेल मै भेजा गया उसके बाद भी उनका हौसला कम नहीं हुवा उन्होने जेल मै भी कैदियों को अपना स्वेत(काले लोग) अधिकार याद दिलाना शुरू कर दिया था। उदर दूसरी तरफ उनके पार्टी ने भी उनको छुड़ाने के पूरी कोशिश की लेकिन वह असफल रहे और नेल्सन मंडेला पुरे 27 साल तक कोठरी मै कैद रहे आखिर कार 1989 को दक्षिण अफ्रीका मै सरकार बदली और उदार वादी नेता F. W. क्लार्क देश के प्रेसिडेंट बने उन्होने नेल्सन और पार्टी के संघर्ष को देखते हुए स्वेत(काले लोग) लोगो पर लगे प्रतिबन्ध को हटा दिया। 


उन सभी कैदी को छोड़ने का फैसला किया जिनपर खून खराबे की case नहीं थी। इस तरह 1 फेब्रुअरी 1990 को मंडेला की जिंदगी के सामने आजादी का सूर्य उदय हुवा और वह जेल से छूट गए उसके बाद 1994 मै दक्षिण अफ्रीका मै प्रेजिडेंट का चुनाव हुवा इस चुनाव मै काले लोग भी चुनाव लड़ सकते थे। 


मंडेला ने इस चुनाव मै भाग लिया और उनकी पार्टी बहुमत के साथ चुनकर आयी। 10 मे 1994 को देश के सबसे पहले स्वेत(काले लोग) राष्ट्रपति बने और बचे हुए सभी लोगो के लिए समान अधिकार लागु किया। नेल्सन मंडेला बहोत हद तक महात्मा गाँधी की राह अहिंसा मार्ग के समर्थक थे। उन्होने गाँधी को अपना प्रेरणा स्त्रोत माना था। इसी वजह से उन्हें अफ्रीकन गाँधी भी कहाँ जाता है। नेलसन मंडेला को 1990 मै भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ऐसे माहान व्यक्ति हमारे बिच से 5 दिसंबर 2013 को ही चल बसें। 


ऐसे व्यक्ति की सघर्ष ने इस रंग भेद की नियम को ही ख़त्म कर दिया। जिसके बाद सभी को समान हक़ मिलने लगे। लेकिन यह इतना आसान भी नहीं था। इसके लिए मंडेला को अपने जीवन का लगभग 28 साल जेल मै बिताना पड़ा था। मंडेला भी गाँधी जी के विचार पर चलने वाले इंसान थे उन्होने बिना हतियार उठाये यह काम कर दिखाया था। 
ऐसे माहान आत्मा को मेरा सादर प्रणाम.. 


अधिक जानकारी के लिए जुड़े रहे