कौओ को खाना खिलाने के पीछे का कारण आईये जानते है

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कौओ को खाना खिलाने के पीछे का कारण 


दोस्तों जैसा की आप जानते है बचपन से लेकर आज तक हम देखते आये है। हमारे भारत मै कौओ को खाना खिलाने के पीछे क्या कारण है? हमने बचपन से लेकर आज तक ये सोचते रहे की क्यों खिलाया जाता है खाना? पर इसका पुख्ता कारण हमें पता न चला पर मै आपको इस तथ्य के बारे मै बताना चाहता हु, तो चलिए दोस्तों जानते है। 


कहा जाता है कौओ को खाना खिलाने से हम अपने पूर्वजो को मिलते है। दोस्तों हमारे हृषी मुनि बहोत ही  क्रन्तिकारी विचारों के थे जैसा की आप जानते है पितृ पक्ष मै कौवे को पवित्र मानकर उनको भोजन दिया जाता है। यह सवाल अक्सर पूछा जाता है की कौओ को ही क्यों? जैसा आप भारत के प्राचीन संस्कृति के बारे मै जानते होंगे हमारे पौराणिक कथाओं मै इसका वर्णन दिया है। 


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गरुड़ पुराण मै बताया गया है कौआ यमराज का सन्देश वाहक होता है। षत पक्ष मै कौवा घर घर जाकर खाना ग्रहण करता है इसमे यमलोक मै स्तिथ देवी देवताओ को तृप्ति मिलती है। 


इसका एक और साइंटिफिक कारण है वो है बरगद और पीपल के वृक्ष, इन दोनों वृक्ष के टेटे कौए खाते है। और उनके पेट मै ही बीज की सारी प्रक्रिया होती है। तब जाकर बीज उसके लायक होता है उसके पछात कौए जहा जहा बिड करते है वहा वहा ये दोनों वृक्ष उगते है। जो ऐसे वृक्ष जो हर वक्त ऑक्सीजन O2 छोड़ता है। और बरगद के औषधी गुण बड़े ही गुणकारी होते है अगर हमें इसे बचाना है तो हमें कौओ को बचाना ही होंगा। 


मादा कौआ भादो महीने मै अंडा देती है और नवजात बचा होता है। तो इस नयी पीढ़ी के बच्चों को आहार की और उनको टिकाये रखने की हमारी जिम्मेवारी है। इसलिए हमारे हृषी मुनिओ ने श्राद्ध के रूप मै कौओ को  पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर दी थी। जिससे कौए के नये जनरेशन का पालन पोषण होता रहे। 


दोस्तों हमारे हृषी मुनि बहोत ही विद्वान और दुर्ग्रही विचारों के थे वह पहले ही जानते थे की किस समय क्या हो सकता है और क्या नहीं। आज भी हम देखे तो जो जड़ीबूटियों का सेवन हम करते है वो उन्ही की देन है। 



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